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Servo Motor - Working, Construction, Types, Uses and Controller in Hindi. Servo and Servo Mechanism

November 11, 2019
इस पोस्ट को पढने के बाद आपको सर्वो motor के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी मिल जाएंगी, आप इस topic को विडियो को मध्यम से भी समझ सकते है जिसको हमने Learn EEE के youtube channel पर उप्लोड़े किया हुवा ह| जैसा की आपको पता होगा की हमारी सभी motors Electrical Energy को Mechanical Energy में बदलती है, ठीक इसी प्रकार से Servo motor भी काम करती है| Servo Motor special purpose motor है जिसको सिर्फ special purpose के लिए ही इस्तेमाल किया जाता है, जैसा की आपने भी देखा होगा की हर जगह इस्तेमाल नही किया जाता है, तो फिर सवाल ये आता है की servo motor को कहा और क्यों इस्तेमाल किया है और servo motor ही क्यों इस्तेमाल की जाती है ? Toys, cnc machines, vmc machines, robotics और हर वो जगह जहां पर हमको अपने object को specific angle पर घुमाना हो या जहां पर हमको high starting torque चाहिए और high accuracy चाहिए वहाँ पर हम servo motor को इस्तेमाल करते है| जिस प्रकार से induction motor की rating HP या KW में होती है ठीक उसी करकार से servo motor की rating KG/CM में होती है| अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |

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Servo Motor - Working, Construction, Types, Uses and Controller in Hindi. Servo and Servo Mechanism
Servo Motor

What is the difference between a Servo Motor and an Induction Motor ?


Servo Motor और Induction Motor को जो चीज अलग करती है वो है इनका control system, servo motor closed loop control system पर काम करती है जिसको हम feedback system भी कहते है लेकिन induction motor open loop control system पर काम करने वाली motors है| induction motors का starting torque servo motors के मुकाबले बहुत कम होता है, induction motors की speed control, temperature control, breaking servo motor के मुकाबले काफी जटिल होती है जबकि हम servo motor की किसी भी angle में घुमा सकते है जैसे की अगर कही पर हमको सिर्फ 180 degree का ही rotation चाहिए तो हम servo motor की मदद से इसे भी प्राप्त कर सकते है लेकिन induction motors में ऐसा नही किया जा सकता |
servo motor के controller को बनाने के लिए हमको PCBs की जरुरत होती है, जिसके लिए हमने JLCPCB से कुछ PCBs आर्डर करी है| JLCPCB से आप किसी भी color की PCBs और prototype PCBs सिर्फ 2$ में आर्डर कर सकते है|

Servo Motor - Working, Construction, Types, Uses and Controller in Hindi. Servo and Servo Mechanism

servo motor का Construction कैसा है ?


जैसा की हमने जाना की servo motor closed loop control system पर काम करने वाली motor है जैसा की निचे block diagram में दिखाया गया है-
Servo Motor - Working, Construction, Types, Uses and Controller in Hindi. Servo and Servo Mechanism
servo motor block diagram


servo motor दो प्रकार के होती है AC servo motor और DC servo motor, servo motor का construction बाकी की motors से थोडा अलग होता है, servo motor में इस्तेमाल होने वाले पार्ट्स है-
  • motor.
  • Controller.
  • Reduction Gear.
  • Encoder/Potentiometer.
Reduction Gear:- एक आम motor की तरह ही servo motor में भी stator और rotor होते है लेकिन servo motor में rotor shaft के साथ ही एक reduction gear लगा होता है जिसकी वजह से इस motor का starting torque बाकी motors की तुलना में बहुत ज्यादा होता है|

Controller:- इस motor को control करने के लिए एक controller इस्तेमाल किया जाता है जो dc servo motors में microcontroller या arduino हो सकता है और ac servo motor में servo drive होती है| ac servo motor का operating voltage उस motor के manufacturer के ऊपर निर्भर करता है की motor की company की है, जैसे की fanuc का control system 3 phase 220V पर काम करता है इसमें एक PSM (Power Supply Module) लगा होता है जोकि 3 phase ac supply को 280V के आस पास dc supply में बदलकर servo drive को देता है और फिर servo drive इस dc supply को 3 phase ac supply में बदलकर servo motor को U V W देती है| निचे image में fanuc की servo drive को servo motor के साथ connect करके दिखाया गया है|
Servo Motor - Working, Construction, Types, Uses and Controller in Hindi. Servo and Servo Mechanism
Servo Motor with Controller (Servo Drive)


Encoder/Potentiometer:- servo motor में सबसे महत्पूर्ण काम करता है इसका encoder या potentiometer जोकि feedback के लिए इस्तेमाल किया जाता है| dc servo motor में potentiometer और ac servo motor में encoder इस्तेमाल किया जाता है, ac servo motor में encoder motor की rpm, motor का temperature, over torque जैसी जानकारी drive को encoder wire की मदद से feedback देता है| निचे दी गई image में आपको servo motor के साथ encoder लगा हुवा दिखाया गया है, इस image में जहां पर specification लिखी हुवी है वो encoder ही है जिसमें उसका model number और serial number जैसी और भी कई जानकारी लिखी हवी है|       
Servo Motor - Working, Construction, Types, Uses and Controller in Hindi. Servo and Servo Mechanism
Encoder for Servo Motor

Servo Motor कैसे काम करती है ?

Servo motor, servo mechanism पर काम करती है जैसा की हम ऊपर servo motor के सभी पार्ट्स के बारे में जान चुके है और हमको पता लग चूका है की servo motor एक closed loop control system या feedback system पर काम करता है, जब हम servo motor के controller को servo motor को चालू करने की command देते है तो controller उस command को चेक करके motor को supply के साथ जोड़ देता है और motor चालू हो जाती है, motor के rotor के साथ ही एक reduction gear box लगा होता है ये motor के अंदर ही होता है हमको बाहर से नही दीखता| gear box का काम motor का starting torque high करना होता है, gear box की shaft के साथ ही encoder भी लगा होता है जो motor की RPM का feedback controller को देता है जिसकी वजह से motor उतनी ही RPM पर चलती है जितना की controller को command दी जाती है या सिर्फ उसी angle पर rotate करती है जिस angle की command controller को दी जाती है| निचे दिए गए closed loop control system के block diagram को ध्यान से देखिए-
Servo Motor - Working, Construction, Types, Uses and Controller in Hindi. Servo and Servo Mechanism
Closed Loop Control System for Servo Motor

हम उम्मीद करते है की आपको ये पोस्ट पढने के बाद servo motor के बारे में पूरी जानकारी मिल गई होगी फिर भी अगर आपके इस topic से related कोई doubt है तो आप निचे comment box में लिख सकते है हम कोसिस करेंगे की आपके सभी doubt clear करें या आप विडियो के माध्यम से भी इस topic को समझ सकते है विडियो भी आपको पोस्ट के आखरी में मिल जाएंगी| 

Servo Motor - Working, Construction, Types, Uses and Controller in Hindi. Servo and Servo Mechanism Servo Motor - Working, Construction, Types, Uses and Controller in Hindi. Servo and Servo Mechanism Reviewed by Joshi Brothers on November 11, 2019 Rating: 5

Losses in DC Generator in Hindi. Copper Losses, Iron Losses and Mechanical Losses.

January 04, 2019
DC Generator एक ऐसी machine है Mechanical Energy को DC Electrical Energy में बदलती है| Mechanical Energy से DC Electrical में बदलते समय इसमें कुछ losses भी  होते है जिनके बारे में आपको इस पोस्ट में पढ़ने को मिलेगा| अगर आपको हमारे द्वारा दी गई ये जानकरी पसंद आए तो कृपया करके इस पोस्ट के निचे हमको comment करके जरूर बताएं| अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |

Losses in DC Generator in Hindi. Copper Losses, Iron Losses and Mechanical Losses.
Losses in DC Generator

Losses in DC Generator (डी. सी जनरेटर में हानिया)


DC Generator में mechanical energy दी जाती है और वो उस mechanical energy को electrical energy में बदलता है| dc generator के अंदर winding और core होने की वजह से इसमें कुछ हानिया (losses) भी होते है, जोकि ऊष्मा के रूप में होते है जिनकी वजह से कुछ power नष्ट हो जाती है या ख़त्म हो जाती है| इस वजह से dc generator को जितनी mechanical energy दी जाती है उससे उतनी ही electrical energy नहीं मिल पाती| मुख्य रूप से एक dc generator के अंदर तीन प्रकार के losses होते है-

  1. Copper Losses (कॉपर लॉसेस)
  2. Iron Losses (आयरन लॉसेस)
  3. Mechanical Losses (मैकेनिकल लॉसेस)

Copper Losses (कॉपर लॉसेस)


Copper Losses एक प्रकार से Variable Losses  होते है और ये losses पूरी तरह से लोड करंट पर आधारित होते है| Copper Losses पूरी तरह से Armature Winding, Field Winding और Brush में होते है|

Armature Winding (आर्मेचर वाइंडिंग)


जब DC Generator चलता है तो DC Generator के Armature Winding में Current पैदा होती है| Armature Winding का भी कुछ Resistance होता है जिसकी वजह से इसके अंदर losses होते है|

Field Winding (फील्ड वाइंडिंग)


DC Generator के field winding में भी कुछ resistance होता है जिसकी वजह से field winding में भी कुछ power losses होते है| field winding, armature के series और parallel में लगाया जाता है|

Brush Contact (ब्रश कांटेक्ट)


जब DC Generator चलता है तो उस DC Generator से बाहरी circuit में supply देने के लिए Carbon Brush का इस्तेमाल किया जाता है| Carbon Brush, के Commutator पर लगे होने की वजह से इसमें हानियां (losses) होते है, क्योकि commutator एक rotating device होती है|

Iron Losses (आयरन लॉसेस)


Iron losses एक प्रकार से constant losses होते है, इनका load current से किसी भी प्रकार का कोई लेना देना नहीं होता है, DC Generator चाहे load से कनेक्ट हो या ना हो ये एक सामान ही रहते है| Iron Losses, Armature or Field Winding की कोर्स में होते है, Iron Losses भी दो प्रकार के होते है-

  1. Hysteresis Losses (हिस्टैरिसीस लॉसेस)
  2. Eddy Current Losses (एड़ी करंट लॉसेस

Hysteresis Losses (हिस्टैरिसीस लॉसेस)


Hysteresis की वजह से होने वाले losses को Hysteresis Losses कहा जाता है, ये Armature core, और Field core में होते है|

Eddy Current Losses (एड़ी करंट लॉसेस)


Eddy Current Losses होने की वजह Armature Core और Field Core में उत्त्पन्न गर्मी होती है| Armature core और Field Core, Silicone Steel के बने होते है, हर एक silicone steel की plate एक दुसरे से पूरी तरह से laminate होती है ताकि cores के बिच का गैप ख़त्म किया जा सके और losses कम किये जा सकें, लेकिन फिर भी जब DC Generator चलता है तो उसके armature में power losses होते है जिनको eddy current losses बोला जाता है|

Mechanical Losses (मैकेनिकल लॉसेस)


जब DC Generator चलला है तो उसके अंदर कुछ mechanical parts भी rotate होते है जैसे की Bearing और Carbon Brush में Friction जिसकी वजह से इसके mechanical parts की लाइफ धीरे - धीरे कम होने लग जाती है और इनको ही Mechanical Losses बोला जाता है|

दोस्तों ये थे Losses in DC Generator हम आसा करते है की ये पोस्ट आपको पसंद आई होगी और इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपके Losses in DC Generator से रिलेटेड सभी doubt clear हो गए होंगे, फिर भी अगर आपके कोई doubt है तो आप निचे comment कर सकते है, हमको ख़ुशी होगी आपके doubt clear करने में|
Losses in DC Generator in Hindi. Copper Losses, Iron Losses and Mechanical Losses. Losses in DC Generator in Hindi. Copper Losses, Iron Losses and Mechanical Losses. Reviewed by Joshi Brothers on January 04, 2019 Rating: 5

Function of Commutator in DC Generator and DC Motor in Hindi. All about Commutator in Hindi

October 13, 2018
Function of Commutator in DC Generator and DC Motor in Hindi. All about Commutator
इस पोस्ट में हम आपको DC Machine में इस्तेमाल होने वाले एक बहुत ही important device के बारे में बताने वाले है जिसको हम commutator कहते है| इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपको पता लग जाएगा हम DC Generator और DC Motor में Commutator का क्या काम है| अगर आप किसी टॉपिक के बारे में हमसे जानना चाहते है तो आप हमसे इस पोस्ट के निचे कमेंट करके पूछ सकते है हम आपके सभी doubt क्लियर करने की कोसिस करेंगे| अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |

Function of Commutator in DC Generator and DC Motor in Hindi. All about Commutator in Hindi
Commutator Working 

Commutator Working in Hindi


एक DC Machine में Commutator बहुत important होता है, क्योकि Commutator ही है जो DC Machines में बाहरी circuit से bushes की मदद से supply लेकर अंदर के circuit को supply देता है। Commutator, Armature में ही लगा होता है और एक Rotating Part होता है, जिसको bushes की मदद से सप्लाई दी जाती है और ये उस सप्लाई को Armature winding तक पहुचता है। हमने आपको अपनी पिछली पोस्ट में lap winding और wave winding के बारे में बताया था, तो ये दोनु ही प्रकार की winding armature में की जाती है और इन winding को commutator सेगमेंट से ही supply voltage दी जाती है।

Construction of Commutator. 


अगर Commutator के बनावट की बात की जाए तो commutator हार्ड ड्रोन कॉपर की पतियों का बना होता है इस प्रकार हर एक पत्ती एक दुसरे से insulated होती है और ये अलग -अलग पत्ती से बनकर तैयार होता है commutator और इस प्रकार से पूरा commutator, armature शाफ़्ट में लगा होता है और armature के साथ ही रोटेट भी होता है| commutator के हर एक सेगमेंट एक दुसरे से insulated होते है हर एक सेगमेंट में armature winding को जोड़ने का arrangement भी किया होता है| हर एक सेगमेंट में armature winding को supply voltage देने के लिए winding का एक सिरे solder किया रहता है जिससे armature winding को supply voltage दी जा सके| |

Commutator का construction, DC Motor और DC Generator में बिलकुल एक सामान रहता है लेकिन इन दोनो में commutator की थोड़ी सी working बदल जाती है dc motor में ये armature को supply voltage देने का काम करता है तो वही dc generator में ये generator से supply voltage लेकर बहरी circuit को देने का काम करता है|

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Function of Commutator in DC Generator and DC Motor in Hindi. All about Commutator in Hindi Function of Commutator in DC Generator and DC Motor in Hindi. All about Commutator in Hindi Reviewed by Joshi Brothers on October 13, 2018 Rating: 5

What is Wave Winding in Hindi ? Definition and Types of Wave Winding in Hindi.

October 05, 2018
What is Wave Winding in Hindi ? Definition and Types of Wave Winding in Hindi.
जब भी DC Machines के Winding की बात आती है तो, Lap Winding और Wave Winding के बारे में जरूर बात की जाती है, क्योकि DC Machines में दो प्रकार की winding की जाती है, पहली है Lap Winding और दूसरी है Wave Winding. इस पोस्ट में हम Wave Winding के बारे में बात करेंगे ताकि इस टॉपिक से related आपके सभी doubt clear हो जाए। आपको ये पोस्ट कैसा लगा आपको इस पोस्ट के नीचे कमेंट करके जरूर बताए और अगर आप हमसे किसी topic को समझना चाहते है तो भी आप कमेंट बॉक्स में हमसे पूछ सकते है, हम आपके सभी doubts clear करने की कोसिस करेंगे। अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |

What is Wave Winding in Hindi ? Definition and Types of Wave Winding in Hindi.
Wave Winding

What is Wave Winding. (वेव वाइंडिंग क्या है ?)


जैसा की हमने आपको बताया की DC Machine में दो प्रकार की Winding की जाती है, पहली है Lap Winding और दूसरी है Wave Winding.  हमने आपको अपनी पिछली पोस्ट में lap winding के बारे में बताया था इस पोस्ट में हम wave winding के बारे में बात कर रहे है| wave winding को हमेशा high voltage और low current के लिए किया जाता है, इस प्रकार की winding में भी winding commutator के सेगमेंट से ही सुरु होती है, winding करते समय पहली coil के लिए wire commutator के पहले सेगमेंट से सुरू होती है लेकिन lap winding की तरह इसमें winding के सिरे पास पास नहीं होते बल्कि इस प्रकार की winding में सिरे कम्यूटेटर में दूर दूर होते है जैसा की ऊपर आपको डायग्राम दिखाई दे रहा होगा| जैसा की हमने आपको ऊपर बताया की wave winding को हमेशा high voltage और low current के लिए किया जाता है|

Types of Wave Winding (wave winding के प्रकार)

  • Simplex Wave Winding 
  • Multiplex Wave Winding 
Multiplex Wave Winding के कुछ प्रकार होते है-

  1. Duplex Winding 
  2. Triplex Winding 
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What is Wave Winding in Hindi ? Definition and Types of Wave Winding in Hindi. What is Wave Winding in Hindi ? Definition and Types of Wave Winding in Hindi. Reviewed by Joshi Brothers on October 05, 2018 Rating: 5

What is Lap Winding in Hindi ? Definition and Types of Lap Winding in Hindi.

October 02, 2018
What is Lap Winding in Hindi ? Definition and Types of Lap Winding in Hindi.  जब भी DC Machines के Winding की बात आती है तो, Lap Winding और Wave Winding के बारे में जरूर बात की जाती है, क्योकि DC Machines में दो प्रकार की winding की जाती है, पहली है Lap Winding और दूसरी है Wave Winding. इस पोस्ट में हम Lap Winding के बारे में बात करेंगे ताकि इस टॉपिक से related आपके सभी doubt clear हो जाए। आपको ये पोस्ट कैसा लगा आपको इस पोस्ट के नीचे कमेंट करके जरूर बताए और अगर आप हमसे किसी topic को समझना चाहते है तो भी आप कमेंट बॉक्स में हमसे पूछ सकते है, हम आपके सभी doubts clear करने की कोसिस करेंगे। अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |

What is Lap Winding in Hindi ? Definition and Types of Lap Winding in Hindi.
Lap Winding

What is Lap Winding. (लैप वाइंडिंग क्या है ?)


जैसा की हमने आपको ऊप्पर बताया की DC Machines में दो प्रकार की Winding इस्तेमाल की जाती है| पहली है Lap Winding और दूसरी है Wave Winding. इस पोस्ट में हम Lap Winding के बारे में आपको बताएंगे| Lap Winding को High Current और Low Voltage के लिए इस्तेमाल किया जाता है| DC Machines में Winding Armature में की जाती है और इस Armature को Electrical Supply, Commutator के द्वारा दी जाती है, Commutator का काम Armature को Supply देना होता है। Commutator में अलग - अलग सेगमेंट बने होते है और हर सेगमेंट से वायर winding की input wire जुड़ी होती है। lap winding इस प्रकार से की जाती है कि wire का पहला सिरा commutator के पहले सेगमेंट से जुड़ा होता है और दूसरा सिरा दूसरे सेगमेंट से जुड़ता है। lap winding में winding करते समय winding के सिरे commutator के पास - पास वाले सेगमेंट में जुड़ते है जिसकी वजह से ये high current और low voltage के लिए बनाया जाता है, जैसा कि आप ऊपर डायग्राम में देख सकते है।

Types of Lap Winding (Lap Winding के प्रकार)

Lap Winding के तीन प्रकार है।

  • Simplex lap winding.
  • Duplex lap winding.
  • Triplex lap winding.
Simplex lap winding

simplex lap winding में वाइंडिंग सिंपल तरिके की जाती है, इस प्रकार की वाइंडिंग में वाइंडिंग का पहला सिरा commutator के पहले सेगमेंट से सुरु होता है और एक coil पूरी होने के बाद इस वाइंडिंग का दूसरा सिरा commutator के दूसरे सेगमेंट से जुड़ा होता है| इस प्रकार की वाइंडिंग में सिर्फ की ही coil होती है और इस coil के सिरे commutator के पास - पास वाले सेगमेंट में जुड़े होते है| 

Duplex lap winding

Duplex lap winding में भी वाइंडिंग commutator के पहले सिरे से सुरु होती है और फिर इस वाइंडिंग का दूसरा सिरा commutator के दूसरे सेगमेंट से जुड़ा होता है, simplex lap winding और duplex lap winding में सिर्फ इतना ही अंतर है की duplex lap winding में दो coil होती है| simplex lap winding में एक coil पूरी होने के बाद coil का दूसरा सिरा commutator के दूसरे सेगमेंट से जुड़ा होता है लेकिन duplex lap winding में पहली coil पूरी होने बाद दूसरी एक और coil होती है और यानी की दो coil पूरी होने के बाद फिर उन दोनो coils का सिरा commutator के दूसरे सेगमेंट से जुड़ होता है| 

Triplex Lap Winding 

Triplex lap winding, lap winding का प्रकार होने की वजह से इसकी वाइंडिंग भी commutator के पहले सेगमेंट से सुरु होकर दूसरी वाइंडिंग पर ख़त्म होती है| इस प्रकार की वाइंडिंग में तीन coil होती है, इसमें वाइंडिंग commutator के पहले सेगमेंट सुरु होती है और तीन coil होने के बाद फिर उस वाइंडिंग का दूसरा सिरा commutator के दूसरे सेगमेंट से जुड़ता है इसलिए इस वाइंडिंग को triplex lap winding कहा जाता है|

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Types of DC Generator in Hindi, DC Series Generator, DC Shunt Generator, DC Compound Generator

July 28, 2018
Types of DC Generator in Hindi, DC Series Generator, DC Shunt Generator, DC Compound Generator:- जैसा की हम जानते है DC Generator एक ऐसी मशीन है जो Mechanical Energy को DC Electrical Energy में बदलता है| वैसे तो आज के समय में DC Generator काफी कम इस्तेमाल में लाए जाते है फिर भी अगर हम इनके इस्तेमाल की बात करें DC Generator को Battery Charging, Electroplating, Labs etc में ज्यादातर इस्तेमाल किया जाता है| वैसे तो DC Motor और DC Generator का Construction एक जैसा होता है लेकिन Working Principle दोनों का अलग - अलग होता| जहाँ DC Motor DC Electrical Energy को Mechanical Energy में बदलता है तो वही DC Generator Mechanical Energy को DC Electrical Energy में डालता है| किसी भी DC Generator में दो Winding होती है पहली Field Winding और दूसरी Armature Winding. अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |

Types of dc Generator in hindi, dc series Generator, dc Shunt Generator, dc Compound Generator
DC Generator

DC Generator के प्रकार (Types of DC Generator)

  • DC Series Generator.
  • DC Shunt Generator.
  • DC Compound Generator.


DC Series Generator:- DC Series Generator का उपयोग वही पर किया जाता है, जहाँ पर स्थिर लोड (Constant Load) हो क्योकि इस Generator का Current, Load पर आधारित होता है। जैसे - जैसे लोड पड़ेगा Generator की Output Current भी बढ़ती चली जाएगी। इसलिए इन Generator को सिर्फ स्थिर लोड पर ही लगाया जाता है। जैसे DC Series Motor में दो Winding होती है, ठीक उसी प्रकार DC Generator में भी दो Winding होती है Field Winding और Armature Winding. इस Generator में Field Winding Armature के series में लगी होती है, जिसकी वजह से Armature Winding और Field Winding दोनों में एक सा Current Flow होता है। DC Series Generator में Field Winding मोटी तार कम टर्न और कम Resistance वाली होती है। इस Generator को चालू करने से पहले इस बात का ध्यान रखा जाता है कि सभी लोड पहले से ही on होने चाहिए। अगर लोड off होंगे तो ये Generator चालू नही होगा। DC Series Generator को Distribution System में Booster की तरह उपयोग किया जाता हैं।

DC Shunt Generator:- DC Shunt Generator में भी दो Winding होती है, पहली Field Winding और दूसरी Armature Winding. इस Generator में Field Winding, Armature के Parallel में लगाई जाती है। field winding पतली तार व ज्यादा टर्न्स वाली होती है। इस Winding का Resistance भी ज्यादा होता है। field winding के Series में एक Resistance लगा होता है जोकि field winding का current और flux दोनों को control करता है। इस प्रकार field winding और resistance दोनों ही Armature के पैरेलल में लगे होते है। इस Generator की लागत काफी कम होती है और इसका साइज भी होता है। Maintenance की दृष्टि से भी ये काफी अच्छे होते है, इनको कम देख रेख की आवश्यकता होती है और इनका voltage भी आसानी से control किया जा सकता है, लेकिन जिस प्रकार DC Series Generator को लोड के साथ ही स्टार्ट किया जा सकता है उस प्रकार DC Shunt Generator को स्टार्ट नही किया जा सकता। ये Generator लोड के साथ स्टार्ट नही होते।

DC Compound Generator:- DC Compound Generator में तीन Winding होती है। Series field winding, Shunt field winding और Armature winding. इस Generator की series field winding मोटी तार व कम टर्न्स की होती है, जिसका Resistance भी कम होता है। Shunt field winding पतली तार व ज्यादा टर्न्स वाली होती है जिसका Resistance ज्यादा होता है। इस Generator की दो types होती है।


  • Cumulative Compound Generator
  • Differential Compound Generator

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Types of DC Motor in Hindi, DC Series Motor, DC Shunt Motor and DC Compound Motor

July 27, 2018
जैसा कि हम सब जानते है, DC Motor DC Electrical Energy को Mechanical Energy में बदलती है। DC Motor को हम अक्सर Train, Tram, Crain, Tools, Toys etc. में बहुत ज्यादा इस्तेमाल में लाते है। DC Motor भी कई प्रकार की होती है, तो हम कैसे पता करेंगे कि किस Motor को कहाँ पर इस्तेमाल करना है। इस पोस्ट में हम इसी के बारे में जानेंगे कि DC Motor कितने प्रकार की होती है और किस मोटर का क्या काम होता है ? अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |
Types of dc Motor in hindi, dc series Motor, dc Shunt Motor, dc Compound Motor
DC Motor

DC Motor के प्रकार। (Types of DC Motor)



(1) DC Series Motor

(2) DC Shunt Motor
(3) DC Compound Motor

DC Compound Motor के भी तीन प्रकार होते है।

(i) Commutative Compound Motor
(ii) Differential Compound Motor


(1) DC Series Motor:- DC Series Motor की Field Winding, Armature के सीरीज में जोड़ी जाती है, इसीलिए इस मोटर को DC Series Motor कहते है। फील्ड वाइंडिंग मोटी तार की व कम टर्नस की होती है, जिसकी वजह से इसका Resistance कम होता है। इस मोटर को Field Winding और Armature Winding दोनों एक समान Current लेते है। मोटर बिना लोड के कम Current लेती है, और जैसे - जैसे लोड बढ़ता है Current भी बढ़ता जाता है। बिना लोड के इस मोटर को स्पीड बहुत ज्यादा होती है, लेकिन लोड के बढ़ने से कम हो जाती है। अगर Starting टार्क की बात करें तो स्टार्टिंग टार्क भी बहुत अधिक होता है, इसलिए इन मोटर्स को वहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है जहाँ पर high starting torque की जरूरत होती है और जहाँ पर लोड पहले से मोटर पर दिया रहता है। जैसे कि Metro Train यहाँ पर लोड पहले से ही मोटर पर होता है। इन motors का उपयोग Train, Tram, Crain, DC fan और Conveyors में सबसे ज्यादा किया जाता है, क्योकि यहाँ पर High Starting Torque चाहिए होता है और लोड पहले से ही Motor पर होता है।

(2) DC Shunt Motor:- इन Motor में Field Winding, Armature के Parallel में लगी होती है, और इन्हें DC Shunt Motor कहते है। इस Motor में field winding पतले तार की व अधिक टर्न की होती है, जिसकी वजह से field winding का Resistance अधिक होता है। इन Motors में Field Winding का Current एक समान ही रहता है लेकिन Armature Current लोड पर आधारित होता है। लोड बढ़ने पर बढ़ जाता है और लोड कम होने पर कम हो जाता है। इन मोटर की स्पीड पर लोड का कुछ ज्यादा प्रभाव नही पड़ता। बिना लोड के स्पीड ज्यादा होती है और लोड पड़ने पर थोड़ी सी कम हो जाती है। DC Shunt Motor का उपयोग ज्यादातर Tools में किया जाता है और लेथ मशीनों में भी इस मोटर को इस्तेमाल किया जाता है, क्योकि इन मोटरों की स्पीड हमेशा लगभग एक समान ही रहती है।

Compound Motor:- इन Motors में फील्ड वाइंडिंग सीरीज और पैरेलल दोनों में होती है। सीरीज फील्ड वाइंडिंग मोटी तार और कम टर्न की होती है, इसका Resistance कम होता है। सीरीज फील्ड वाइंडिंग में करंट लोड पर आधारित होता है। कम लोड होगा तो सीरीज वाइंडिंग कम करंट लेगी और अगर ज्यादा लोड होगा तो फील्ड वाइंडिंग ज्यादा करंट लेगी। पैरेलल फील्ड वाइंडिंग पतले तार व अधिक टर्न्स की होती है। इस वाइंडिंग का Resistance भी अधिक होता है। पैरेलल फील्ड वाइंडिंग में करंट लगभग एक समान ही रहता है।
Compound Motor भी दो प्रकार के होते है:-

Cumulative Compound Motor:- Cumulative Compound Motor के सीरीज और पैरेलल वाइंडिंग में करंट एक ही दिशा में Flow होता है। इन मोटरों में स्पीड लोड पर आधारित होती है, बिना लोड के स्पीड अधिक होगी और लोड के बढ़ने के साथ - साथ कम हो जाएगी। इन मोटरों को वहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है जहाँ पर लोड एक दम से मोटर पर आ जाता है और फिर चला जाता है। जैसे हैमर, पंचिंग मशीन, शेयरिंग मशीन, लिफ्ट आदि।

Differential Compound Motor:- इन मोटरों में सीरीज और वाइंडिंग एक दूसरे का विरोध करते है। इन मोटरों में ज्यादा लोड होने पर फ्लक्स कम होगा और कम लोड होने पर फ्लक्स ज्यादा होगा। इन मोटरों की ये खासियत है कि इन मोटरों की बिना लोड के कम स्पीड होती है और जैसे - जैसे लोड बढ़ता है स्पीड भी बढ़ती जाती है। इन मोटरों को ज्यादातर Battery Charging के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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Types of DC Motor in Hindi, DC Series Motor, DC Shunt Motor and DC Compound Motor Types of DC Motor in Hindi, DC Series Motor, DC Shunt Motor and DC Compound Motor Reviewed by Joshi Brothers on July 27, 2018 Rating: 5

DC Motor Working Principle in Hindi, DC Motor Direction Changing Methods in Hindi

July 25, 2018
इस पोस्ट में हम दो topics के बारे में जानेंगे, DC Motor Working Principle in Hindi, और DC Motor Direction Changing Methods in Hindi, जैसा कि हमको पता है DC Motor, DC Electrical Energy को Mechanical Energy में बदलती है जोकि हमने पिछले पोस्ट में detail में discuss किया था। अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |
DC Motor Working Principle in Hindi
DC Motor Working Principle in hindi

DC Motor Working Principle in Hindi...

DC Motor मैग्नेटिक ड्रैग (Magnetic Drag) के सिद्धांत पर काम करती है। Magnetic Drag के सिद्धांत के अनुसार जब भी कोई करंट ले जाता हुवा कंडक्टर चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Area) में रखा जाता है तो उस कंडक्टर में एक टार्क पैदा होता है, जो उस कंडक्टर को मुख्य चुंबकीय अक्ष के 90° पर घुमाने की कोशिश करता है।

DC Motor Direction Changing Methods:-

कोई बार ऐसा होता है कि हमको अपने मोटर Direction Change करनी पड़ जाती है। DC Motor की Direction 2 तरह से बदली जा सकती है:-

(1) जो मुख्य चुंबकीय फील्ड है उसकी दिशा बदलकर और
(2) आर्मेचर में करंट की दिशा बदलकर।


(1) चुंबकीय फील्ड की दिशा बदलकर:- इस Method में हम DC Motor में चुंबकीय फील्ड की दिशा बदल देते है, जब चुंबकीय फील्ड की दिशा बदल जाती है तो उसकी वजह से मोटर की धूमने की दिशा भी बदल जाती है। माना पहले से मोटर में N और S पोल जहाँ है उसकी जगह पर S और N कर दिया जाता है।

(2) आर्मेचर में करंट की दिशा बदलकर:- इस Method में हम मोटर के आर्मेचर को दी जाने वाले DC Voltage की दिशा को बदल देते है जिससे मोटर के घूमने की दिशा बदल जाती है। पहले हमने जिस वायर में Positive और Negative Connection किए थे अब इन कनेक्शन को बदल कर Positive की जगह Negative और Negative की जगह Positive करने से मोटर के घूमने की दिशा बदल जाती है।

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DC Motor Working Principle in Hindi, DC Motor Direction Changing Methods in Hindi DC Motor Working Principle in Hindi, DC Motor Direction Changing Methods in Hindi Reviewed by Joshi Brothers on July 25, 2018 Rating: 5

DC Generator Working Principle in Hindi. DC Generator Construction in Hindi

July 16, 2018
DC Generator एक ऐसी DC Machine है, जो Mechanical Energy को DC Electrical Energy में बदलती है। अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |
DC Generator Working Principle in Hindi.
DC Generator

DC Generator का Working Principle

DC Generator फैराडे के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्सन के सिद्धांत पर काम करता है। फैराडे के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्सन के अनुसान जब भी कोई चालक (Conductor) किसी चुम्बकीय बल रेखाओ को काटता है या काटने की कोसिस करता है तो उन चालको (Conductors) में EMF पैदा होती है, और ये EMF फ्लक्स (Flux) परिवर्तन की दर और उन चालकों की संख्या के समानुपाती (Proportional) होती है।

DC Generator के मुख्य भाग:-


(1) स्टेशनरी भाग (Stationary Parts)
(2) रोटेटिंग भाग (Rotating Parts)

(1) स्टेशनरी भाग (Stationary Parts):- ये DC Generator के वह भाग होते है जो DC Generator के चलने की स्थिति में स्थिर रहते है, इस दौरान Generator के इन भागों में किसी भी प्रकार का कोई Movement नही होता, और ये भाग है:-

(a) बॉडी (Body):- Body Generator का वह भाग होता है जिसमें पूरा Generator Cover किया रहता है| इसमें Generator की Armature Winding, Field Winding और शाफ़्ट सभी Body से कवर होते है। आज कल body ज्यादातर Fabricated Steel की बनाई जाती है।


(b) आई - बोल्ट (Eye Bolt):- Eye Bolt, Generator body के सबसे ऊपर वाले भाग में लगा होता है। इसको लगाने का मुख्य कारण यही होता है, की जब भी Generator को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना हो तो Eye Bolt की मदद से उठाकर ले जाया जा सकता है। Eye Bolt Generator के साइज पर निर्भर करता है कि कितना बड़ा या कितने Eye Bolt लगाने है। वैसे Eye Bolt सभी मशीनों में लगाए जाते है।

(c) पोल (Pole):- Pole कास्ट आयरन या नर्म स्टील को lamination करने बनाया जाता है, ये या तो body पर फिक्स किये रहते है या फिर body से अलग होते है।

(d) योक (Yoke):- ये DC Generator के Construction करने वाले पर निर्भर करता है कि वो एक Generator में Yoke और body दोनों लगाता है या इनमें से कोई एक क्योकि कभी - कभी या तो Yoke लगा रहता है या फिर Body होती है। Yoke, Magnetic Flux के लिए एक आसान रास्ता बनाने का काम करता है।

(d) ब्रश और ब्रश गियर (Brush or Brush Gear):- Brush का मुख्य काम Generator के Commutator से Supply Voltage लेकर उसको बाहरी Circuit को देना होता है। शायद आपने Hand Grill Machine में Brush देखें हो, उसमें जो Brush लगते है वो Carbon Brush होते है, जिनका काम बाहरी Circuit से Voltage लेकर Armature को देना होता है।

DC Generator में तीन प्रकार के Brush प्रयोग किए जाते है।

(i) कॉपर ब्रश (Copper Brush):- Copper Brush ज्यादातर ज्यादा Rating वाले यानी कि बडे Generators में इस्तेमाल किया जाता है, क्योकि Copper का होने की वजह से ये काफी Hard होते है, जिसकी वजह से Commutator के खराब होने की सम्भावनाएं बड़ जाती है, और जिनका Resistance भी कम होता है।
(ii) कार्बन ब्रश (Carbon Brush):-  जैसा कि हमने ऊपर बताया था आपको की Carbon Brush, Drill Machine में भी इस्तेमाल किए जाते है। carbon brush सबसे ज्यादा इस्तेमाल में आने वाले brush होते है, क्योकि इनके इस्तेमाल से Commutator के कोई नुकसान नही होता ये Copper Brushs की तरह hard नही होते।

(iii) कॉपर और कार्बन ब्रश (Copper or Carbon Brush):- Copper or Carbon Brush को High Rating के Generators में इस्तेमाल किया जाता है। इनको Copper और Carbon के मिश्रण से बनाया जाता है।

(e) साइड कवर (Side Cover):- Side Cover, Generator की Body को कवर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसमें Bearing लगे होते है जोकि शाफ़्ट को सही से center में रखते है।

(f) बेयरिंग (Bearing):- किसी भी Machine में Bearing को इस्तेमाल करने का मुख्य कारण Machine के चलते समय घर्षण कम करना होता है। घर्षण के होने से Losses होते है और घर्षण जितना कम किए जा सकें उतनी ही Machine की लाइफ बढ़ती है। Bearing को DC Generator में भी घर्षण कम करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, और इनके इस्तेमाल से मशीन की Smoothness भी बढ़ जाती है।

बेयरिंग (Bearing) के भी तीन प्रकार होते है:-

(i) स्लीव बेयरिंग (Sleeve Bearing):- Sleeve Bearing का इस्तेमाल कम Rating या छोटे Generators में किया जाता है।

(ii) बाल बेयरिंग (Ball Bearing):- Ball Bearing सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला Bearing है। इसके अंदर छोटे - छोटे Balls लगे होते है जिनमे ग्रीस लगाकर इनकी चिकनाई और Smoothness और भी ज्यादा बड़ाई जाती है।

(iii) रोलर बेयरिंग (Roller Bearing):- Roller Bearing, high Rating के Generators के लिए इस्तेमाल किए जाते है। इन Bearings को ज्यादा से ज्यादा वजन सहन करने के लिए design किया जाता है और ये काफी समय तक चलते है।

(2) रोटेटिंग भाग (Rotating Parts):- ये भाग DC Generator के वो भाग होते है जो DC Generator के चलने के समय Movement करते है, और ये भाग है:-

(a) आर्मेचर (Armature):- DC Generator में Armature एक Rotating Part होता है। Armature Magnetic Area में घूमता है। इसमें winding के लिए slots बने होते है, जिनमे armature winding की जाती है। Armature, Silicone Steel को Laminate करके बनाया जाता है, ताकि Eddy Current Losses और Hysteresis Losses को कम किया जा सके।

(b) कम्यूटेटर (Commutator):- Commutator हार्ड कॉपर का segment होता है और हर एक segment एक दूसरे से laminate करके shaft पर लगे होते है। Commutator की मदद से ही Generator, Brush को output voltage देता है और फिर Brush उस voltage को बाहरी circuit तक पहुचा देते है।

(c) पंखा और शाफ़्ट (Fan and Shaft):- shaft and fan भी DC Generator के Rotating भाग होते है। fan, Commutator के opposite side में लगा होता है ये Generator को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। fan cast iron के बने होते है। shaft पर Fan, Armature, Commutator और Bearing लगे होते है। shaft को mild steel से बनाया जाता है।

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What is DC Motor in Hindi, Where use DC Motor in Hindi

July 14, 2018
इस पोस्ट में हम जानेंगे कि DC Motor क्या होती है, और DC Motor को कहाँ - कहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |
What is DC Motor in Hindi, Where use DC Motor in Hindi
What is DC Motor in Hindi, Where use DC Motor in Hindi

DC Motor एक ऐसी Machine है जो DC Electrical Energy को Mechanical Energy में बदलती है। DC Motor और DC Generator की बनावट एक समान होती है लेकिन इनका कार्य एक दूसरे से बिल्कुल अलग होता है। एक तरफ जहां DC Motor DC Electrical Energy को Mechanical Energy में बदलता है, तो वही DC Generator Mechanical Energy को DC Electrical Energy में बदलता है।


DC Motor Uses...

आज के समय मे DC Motor को काफी इस्तेमाल में लाया जाता हैं, क्योकि इनके इस्तेमाल से Electrical Energy को बचाया जा सकता है। dc motor तीन प्रकार की होती है और इसी के आधार पर इनको काम मे लिया जाता है।

(1) DC Series Motor....

 DC Series Motor की Field Winding, Armature के सीरीज में जोड़ी जाती है, इसीलिए इस मोटर को DC Series Motor कहते है। फील्ड वाइंडिंग मोटी तार की व कम टर्नस की होती है, जिसकी वजह से इसका Resistance कम होता है। इस मोटर को Field Winding और Armature Winding दोनों एक समान Current लेते है। मोटर बिना लोड के कम Current लेती है, और जैसे - जैसे लोड बढ़ता है Current भी बढ़ता जाता है। बिना लोड के इस मोटर को स्पीड बहुत ज्यादा होती है, लेकिन लोड के बढ़ने से कम हो जाती है। अगर Starting टार्क की बात करें तो स्टार्टिंग टार्क भी बहुत अधिक होता है, इसलिए इन मोटर्स को वहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है जहाँ पर high starting torque की जरूरत होती है और जहाँ पर लोड पहले से मोटर पर दिया रहता है। जैसे कि Metro Train यहाँ पर लोड पहले से ही मोटर पर होता है। इन मोटरों का इस्तेमाल Crain, Train, Tram, Fan, Trolley और Conveyor जैसी और भी बहुत जगह किया जाता है।

(2) DC Shunt Motor...

इन Motor में Field Winding, Armature के Parallel में लगी होती है, और इन्हें DC Shunt Motor कहते है। इस Motor में field winding पतले तार की व अधिक टर्न की होती है, जिसकी वजह से field winding का Resistance अधिक होता है। इन Motors में Field Winding का Current एक समान ही रहता है लेकिन Armature Current लोड पर आधारित होता है। लोड बढ़ने पर बढ़ जाता है और लोड कम होने पर कम हो जाता है। इन मोटर की स्पीड पर लोड का कुछ ज्यादा प्रभाव नही पड़ता। बिना लोड के स्पीड ज्यादा होती है और लोड पड़ने पर थोड़ी सी कम हो जाती है। इन मोटरों का उपयोग ज्यादातर Tools को बनाने के लिए किया जाता।

(3) DC Compound Motor.

इन Motors में फील्ड वाइंडिंग सीरीज और पैरेलल दोनों में होती है। सीरीज फील्ड वाइंडिंग मोटी तार और कम टर्न की होती है, इसका Resistance कम होता है। सीरीज फील्ड वाइंडिंग में करंट लोड पर आधारित होता है। कम लोड होगा तो सीरीज वाइंडिंग कम करंट लेगी और अगर ज्यादा लोड होगा तो फील्ड वाइंडिंग ज्यादा करंट लेगी। पैरेलल फील्ड वाइंडिंग पतले तार व अधिक टर्न्स की होती है। इस वाइंडिंग का Resistance भी अधिक होता है। पैरेलल फील्ड वाइंडिंग में करंट लगभग एक समान ही रहता है। Compound Motor भी दो प्रकार के होते है:-


(i) DC Commutative Compound Motor...

Cumulative Compound Motor के सीरीज और पैरेलल वाइंडिंग में करंट एक ही दिशा में Flow होता है। इन मोटरों में स्पीड लोड पर आधारित होती है, बिना लोड के स्पीड अधिक होगी और लोड के बढ़ने के साथ - साथ कम हो जाएगी। इन मोटरों को वहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है जहाँ पर लोड एक दम से मोटर पर आ जाता है और फिर चला जाता है। इस प्रकार की मोटरो का उपयोग Sewing Machine, Pinching Machine, Power Hammer और Press जैसी कई मशीनों में किया जाता है।

(ii) Differential Compound Motor...
इन मोटरों में सीरीज और वाइंडिंग एक दूसरे का विरोध करते है। इन मोटरों में ज्यादा लोड होने पर फ्लक्स कम होगा और कम लोड होने पर फ्लक्स ज्यादा होगा। इन मोटरों की ये खासियत है कि इन मोटरों की बिना लोड के कम स्पीड होती है और जैसे - जैसे लोड बढ़ता है स्पीड भी बढ़ती जाती है। इस प्रकार की मोटरों का उपयोग बहुत कम किया जाता है ये मोटरें ज्यादा तक Battery को Charge करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

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