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What is Circuit Breakers in Hindi ? Types of Circuit Breakers in Hindi.

August 04, 2018
What is Circuit Breakers in Hindi ? Types of Circuit Breakers in Hindi:- सभी Electrical Machines को Protect करने के लिए Switchgears का इस्तेमाल किया जाता है। Switchgears में Circuit Breakers भी आते है जो हमारे Electrical Circuit और Electrical Machines को Protect करती है। Protect करने से मतलब है कि ये Machines या Circuit को Overload, Short Circuit, Under Voltage, Over Voltage, Under Current व Over Current से बचाते है। जैसे कि Circuit Breakers को Sub-Station में Transformer से पहले लगाया जाता है, ताकि Transformer को Protection दिया जा सकें। वैसे तो हम अपने Electrical Circuit को Protect करने के लिए Fuse, MCB या MCCB का इस्तेमाल करते है जोकि सभी Switchgears है, लेकिन जब High Voltage में Protection करने की बात आती है तो वहाँ पर Fuse, MCB या MCCB को इस्तेमाल नही किया जा सकता। Circuit में fuse के लगे होने पर, जब circuit में fault आता है तो fuse wire melt होकर Faulty circuit को supply से अलग कर देती है। इस condition में fuse को बदल कर ही circuit को दोबारा चालू किया जा सकता है। बार - बार fuse बदलने से इसकी cost बड जाती है, इसलिए high voltage (3.3KV से ऊपर) के लिए Circuit Breakars को इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |
What is Circuit Breakers in Hindi ? Types of Circuit Breakers in Hindi.
Circuit Breakar

Circuit Breakers, faulty होने के समय faulty circuit को तुरंत supply voltage से अलग कर देते है वो भी बिना खुद Damage हुवे, और जब circuit ठीक हो जाता है तो ये अपने आप ही Supply ON कर देते है या Supply ON, Manually भी किया जा सकता है। Circuit Breakers को Making Capacity और Short Circuit Rating के लिए Design किया जाता है। Making Capacity मतलब की जब circuit में fault हो तो उस समय जिस force के साथ circuit breaker, supply voltage को circuit से अलग करेगा वो force सहने की क्षमता देखी जाती है, और Short Circuit Rating मतलब की जब circuit में short circuit हो तो उस समय बहुत ज्यादा short circuit current पैदा होती है। उस short circuit current को सहन करने के लिए भी circuit breaker को design किया जाता है।

Circuit Breakars के प्रकार (Types of Circuit Breakars)


  • एयर सर्किट ब्रेकर (Air Circuit Breakar A.C.B)
  • आयल सर्किट ब्रेकर (Oil Circuit Breakar O.C.B)
  • एयर ब्लास्ट सर्किट ब्रेकर (Air Blast Circuit Breakar A.B.C.B)
  • वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (Vacuum Circuit Breakar V.C.B)
  • SF6



एयर सर्किट ब्रेकर (Air Circuit Breakar A.C.B):- ये Circuit Breakar ज्यादातर low voltage के लिए बनाए जाते है। जैसे कि अगर किसी Company के Control Panel से पूरी company की supply voltage control करनी हो तो वहाँ पर इस circuit breaker को इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योकि कंपनियों में ज्यादातर three phase 440V ही कंट्रोल करने होता है। इस circuit breaker में कांटेक्ट जब supply voltage को circuit से अलग करते है तो उस समय Sparking की वजह से Arc पैदा होता है। इस Arc को खत्म करने के लिए जब कांटेक्ट अलग हो रहे होते है उस समय तेरी से हवा इन कांटेक्ट में जाती है जिससे arc पैदा होने का खतरा खत्म हो जाता है। इस circuit breaker में air के storage के लिए अलग से space होता है और air manually इससे निकले एक हैंडल से चार्ज करके भरी जाती है और जब circuit breaker के कांटेक्ट अलग होते है तो तेजी से circuit breaker इस air को कांटेक्ट में डालता है।

What is Circuit Breakers in Hindi ? Types of Circuit Breakers in Hindi.
Oil Circuit Breakar (O.C.B)

आयल सर्किट ब्रेकर (Oil Circuit Breakar O.C.B):- ये एक कॉमन circuit breaker है, और इसको काफी इस्तेमाल किया जाता है। अगर आपके घर के आस - पास कोई Sub-Station हो तो अगर आप वहाँ जाकर देखेंगे तो वहाँ आपको कई O.C.B देखने को मिलेंगी। O.C.B हमेशा high voltage जैसे कि 11000V के लिए design किए जाते है। इस circuit breaker में अलग होने वाले कांटेक्ट तेल में डूबे होते है जिसकी वजह से इनको Oil Circuit Breakar (O.C.B) कहाँ जाता है। अलग होने वाले कांटेक्ट तेल में डूबे होने के कारण arc पैदा नही होती है क्योंकि ये तेल arc पैदा नही होने देता। इस circuit breaker में oil को इस्तेमाल करने के कई फायदे होते है जैसे कि ये oil एक Insulator की तरह काम करता है और जब कांटेक्ट अलग होते है तो उससे पैदा होने वाली गर्मी से कांटेक्ट गर्म हो जाते है, उस समय Oil Cooling Provide करता है और कांटेक्ट को ठंडा रखता है जिससे इनकी life बढ़ती है।

एयर ब्लास्ट सर्किट ब्रेकर (Air Blast Circuit Breakar A.B.C.B):- इन circuit breaker को Transmission में इस्तेमाल किया जाता है, क्योकि ये Extra High Voltage के लिए design किए जाते है जैसे कि 400KV. इन Circuit Breakars में अलग होने वाले कांटेक्ट में air का ब्लास्ट किया जाता है। इसके लिए इसमें अलग से air compressor लगा होता है जो जरूरत पड़ने पर इसके कांटेक्ट में air blast करता है जिससे arc पैदा होने की कोई भी सम्भावना नही बनती।

वैक्यूम सर्किट ब्रेकर (Vacuum Circuit Breakar V.C.B):- इन circuit breaker को भी high voltage के लिए design किया जाता है। इनमें अलग होने वाले कांटेक्ट जहां पर अलग होते है वहाँ बिल्कुल भी हवा नही होती जिसकी वजह से arc पैदा नही हो पाती क्योकि बिना ऑक्सीजन के arc पैदा नही हो सकती इसलिए ही अलग होने वाले कांटेक्ट के आस पास बिल्कुल भी हवा नही होती।

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What is Fuse in Hindi, Types of Fuse in Hindi, HRC Fuse

August 03, 2018
What is Fuse in Hindi, Types of Fuse in Hindi:- Fuse एक Protective Device है, जो किसी भी Circuit को Protect करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। Fuse एक Wire होती है, जो Circuit के Current की क्षमता के हिसाब सेलेक्ट किए जाते है। Fuse Electrical और Electronics दोनों Circuits में इस्तेमाल किए जाते है। ये किसी भी Circuit में आवश्यकता से ज्यादा Current Flow नही होने देते। अगर Circuit में किसी कारण की वजह से आवश्यकता से ज्यादा Current Flow होती है तो ये Circuit को Supply से अलग कर देते है, इसलिए इनको Circuit का सबसे कमजोर भाग माना जाता है। अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |
What is Fuse in Hindi, Types of Fuse in Hindi
Fuse

Fuse का उपयोग (Uses of Fuse)


Fuse एक protective device है इसका उपयोग करने का बस एक ही कारण होता है, Circuit को Protect करना। जब भी हम किसी circuit के लिए fuse को select करते है, तो सबसे पहले अपने circuit के current लेने की क्षमता दो देख लेते है, और फिर Circuit के Current को देखते हुवे Fuse Select करते है। अगर कभी उस Circuit में कोई Short Circuit हो जाता है, तो इस दशा में Circuit में  बाहुत ज्यादा Current Flow होने लगेगी, अगर उस circuit में कोई Protective Device ना लगाया गया हो तो वो Circuit खराब हो सकता है या जल भी सकता है क्योकि Circuit Overload होने पर बहुत ज्यादा ऊष्मा (heat) पैदा होती है। लेकिन Fuse के इस्तेमाल करने से Fuse wire heat के कारण जल जाती है और circuit बच जाता है, क्योकि fuse हमेशा किसी भी Circuit के series में लगाया जाता हैं। fuse wire हमेशा मिश्र धातु या फिर टिंड कॉपर (Tinned Copper) की बनी होती है, और fuse wire का melting point काफी कम रखा जाता है। fuse wire में वो ही धातु इस्तेमाल की जाती है जिसका melting point कम से कम हो।

Fuse Wire


Fuse wire का प्रतिरोध (Resistance) काफी कम होता है। इसके लिए उन धातुओ को ही इस्तेमाल किया जाता है, जिनका Resistance कम हो और Melting point भी कम से कम हो। Fuse wire चांदी, सोना, टिंड कॉपर और लैड व टिन की मिश्रधातु की बनाई जा सकती है। ज्यादातर fuse wire के लिए चांदी की तार का इस्तेमाल किया जाता है।

HRC Fuse


HRC Fuse भी एक साधारण fuse की तरह ही होता है, लेकिन ये दिखने में साधारण fuse से बिल्कुल अलग होते है। इन fuses में fuse wire एक पोर्सलीन के container के अंदर होते है, जिसमें fuse wire के साथ रेत भरी रहती है। इन fuses में Container के दोनों सिरों में दो terminal निकले होते है जिसमे connection किया जाता है। HRC Fuse, High Rating के होते है। अगर कभी Circuit में कोई short circuit हो जाए तो इस केस में fuse wire से होती हुई बहुत ज्यादा current flow होगी और fuse wire गर्म होकर तेजी से उड़ जाएगा। इसलिए HRC Fuse की Fuse wire को Container में रखा जाता है, और Container में रेत भरा रहता है ताकि fuse wire उड़ने पर किसी तरह से आग लगने का खतरा ना रहे।

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What is Switchgears in Hindi. Know all about Switchgears in Hindi.

August 02, 2018
What is Switchgears in Hindi. Know all about Switchgears in Hindi:- अक्सर Exam में या Interview में ये Question पूछ लिया जाता है, कि What is Switchgear ? इसका Answer तो सिर्फ दो लाइन का है, लेकिन तब जब हमको पता हो कि असल में Switchgear होते क्या है। जो भी Components या Devices हमारे Electrical, Electronics Circuit और Machines को Protection देते है, Control करते है, Isolate करते है या Switching करते है वो सभी Switchgears है। अब बात आती है कि ये Components या Devices कौन - कौन से है ? अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |

What is Switchgears in Hindi. Know all about Switchgears in Hindi.
Switchgears

Electrical Switchgears


Switchgears दो प्रकार के होते है एक तो Indoor Switchgears और दूसरे Outdoor Switchgears. Indoor Switchgears वो होते है जिनको हम 66KV से कम Voltage के लिए इस्तेमाल करते है, और Outdoor Switchgears वो होते है जिनको जिनको 66KV से ज्यादा के Voltage के लिए इस्तेमाल किया जाता है। Outdoor Switchgears का Installation Cost ज्यादा होती है और Safety की वजह से भी इनको Indoor में Install नही किया जाता। Switchgears में आने वाले Devices है:-


Fuse:- Fuse एक Switchgear है जोकि Electrical Circuit को short circuit होने पर बचाता है। fuse, low rating और high rating दोनों में उपलब्ध होते है। HRC Fuse एक high rating का fuse है जिसको industry में machines को protect करने के लिए बाहुत ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।
Relay:- Relay, Electrical Circuit और Machines में Protection और Switching दोनों के लिए इस्तेमाल की जाती है। सभी Relay में Electrical और Mechanical दोनों Operation होते है। रिले में एक Electrical Operating Coil होती है जो Electromagnetic Induction पर काम करती है। कुछ Relay Thermal Operated भी होते है, जैसे की Thermal Overload Relay जोकि Motors को Protect करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।


Circuit Breakers:- Circuit Breakers, Electrical Circuit में बहुत ज्यादा Important है। Circuit Breakers के high rating की बात करें तो ये ज्यादातर Sub-Station में इस्तेमाल किए जाते है। जैसे कि Oil Circuit Breaker, Air Circuit Breaker, Air Blast Circuit Breaker, SF6 और Vacuum Circuit Breaker. ये सभी Short Circuit के केस में हमारे circuit को Protection देते है और Fault दूर होने पर Circuit को फिर से चालू कर देते है। ये सभी Circuit Breaker, Automatic और Manual दोनों प्रकार से काम करते है। अगर इसके low rating की बात करें, तो जो 6A के Switch और MCB (Miniature Circuit Breaker) हमारे घरों में लगे होते है वो भी Switchgears है।


Lighting Arrester:- Lighting Arrester बहुत ही important पार्ट होता है। इसको ज्यादातर Sub-Station में सभी मशीनों के ऊपर लगाया जाता है और Electrical Transmission Line में भी सभी Poles के सबसे ऊपर Lighting Arrester लगाया जाता है। इसका मुख्य काम आसमानी बिजली से हमारे Electrical Machines और Equipment's को बचाना होता है, क्योकि जब भी आसमान से बिजली गिरती है तो वो हज़ारों Amp. और लाखों Voltage की होती है। अगर ये हज़ारो Amp. वाली बिजली हमारे किसी भी Machine पर पड़ेगी तो उस Machine को तुरंत जला देगी। इससे बचने के लिए सभी Outdoor Machines में सबसे ऊपर वाले भाग में Lighting Arrester लगाए जाते है। अगर आसमानी बिजली इनके ऊपर पड़ती है तो ये उस Current और Voltage को तुरंत Earth कर देते है और Machines व Transmission Line को Protection देते है।

ये सभी Devices, Electrical Circuit में इस्तेमाल किए जाते है जोकि Electrical Circuit में  Protection, Switching, Isolating और Controlling करने के काम आते है।

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Contactor Working and Connection in Hindi, Contactor Connection

July 24, 2018
Contactor Working and Connection in Hindi:-  Contactor एक ऐसा डिवाइस है जिसको Industry में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है| Contactor को अगर हम आसान भाषा में समझे की कोसिस करें तो ये एक स्विच है जिसको हम Automatic Control कर सकते हैं| चलिए समझने की कोसिस करते है की Contactor कैसे काम करता है और इसके कनेक्शन किस तरह किए जाते है| अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |
Contactor Working and Connection in Hindi
Contactor

जैसा की हमने आपको बताया की Contactor एक switch है जिसको हम automatic control कर सकते है| single phase AC supply की switching करना आसान है, लेकिन जब Three Phase AC Supply की बात आती है तो हम Switching के लिए Contactors को इस्तेमाल में लाते है|

Contactor Working:-



Contactor एक सिंपल लेकिन बहुत ही काम का device है, इसको हम दो हिस्सों में बाट सकते है एक हिस्सा जोकि Mechanically काम करता है और दूसरा वो जो Electrically काम करता है| जो हिस्सा Mechanically काम करता है, उसमें 3 या 4 input और output connectors होते है, जिनमें हम अपने इनपुट वायर इनपुट connectors में और आउटपुट वायर आउटपुट connectors में जोड़ सकते है| input और output connectors को एक plunger आपस में कनेक्ट करता है जोकि एक इलेक्ट्रिकल coil की वजह से होता है| जब भी हम coil को supply voltage देते है तो coil में एक electromagnetic field पैदा होता जोकि उस plunger को अपनी तरफ खींचता है जिससे input और output connectors आपस में मिल जाते है, और इस तरह से एक Contactor switching करता है|
Contactor Working and Connection in Hindi
Contactor Coil

जितने भी Contactor होते है सभी का working principle यही होता है, contactor AC और DC दोनों में आते है| AC, DC मतलब की इनकी coil AC और DC दोनों supply के लिए design की जाती है| market में आपको 24V DC, 42V AC, 110V AC, 220V AC, और 440V AC से operate होने वाले Contactors मिल जायेंगे|

Contactor Connection:-


किसी भी Contactor को इस्तेमाल में लेने से पहले हमको ये देखना जरूरी है कि उस contactor के coil की operating voltage कितनी है। उसके बाद हमको उस Contactor के ऊपर वाले तीनो टर्मिनल पर तीनों फेज R, Y, B कनेक्ट करने चाहिए और नीचे के तीनों टर्मिनल के आउटपुट ले लेना चाहिए। सभी Contactors की Coil पर A1 और A2 नंबर डले होते है। coil के connection के लिए हम A1 और A2 पर Connection करते है। इस प्रकार किसी भी Contactor के Connection किए जाते है।

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Relay Working Principle in Hindi, Relay Connection in Hindi.

July 17, 2018
दोस्तो इस पोस्ट में आपको relay के working principle, construction और connection के बारे में जानने को मिलेगा। अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |

Relay Working Principle in Hindi
Relay Working Principle

Realy क्या है ? (What is Relay)

Relay एक ऐसा Device है जो Switching करने के काम आता है। ये किसी भी Circuit को असमान्य स्थिति में उसको Supply से अलग कर देती है। जिससे Circuit को किसी भी प्रकार की कोई हानि नही होती और हमारा Circuit बच जाता है।
Example:- Thermal Overload Relay ये एक ऐसी Relay है जिसको हम AC मोटरों की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करते है ताकि कभी मोटर Overload हो तो ये Relay, Motor को सप्लाई से अलग कर दे और मोटर जलने से बच जाए। इसलिए Relay एक Protective Device है।

Relay का कार्य सिद्धान्त। (Relay Working Principle)


Relay एक बिल्कुल simple सा device है इसके अंदर एक coil होती है जो कि AC या DC दोनों में हो सकती है, और इसमें एक NO point और एक NC point भी होता है। जब भी Relay की Coil को सप्लाई वोल्टेज दी जाती है तो ये Switching करने लगता है, Coil को सप्लाई वोल्टेज मिलते है ये NO को NC और NC को NO बना देता है। जब Relay की Coil को सप्लाई दी जाती है तो इसकी Coil में एक Magnetic field बन जाता है इसके पास एक Plunger लगा होता है और ये Plunger NO और NC से जुड़ा होता है, Coil के Magnet बनते है ये Plunger Coil की तरफ आकर्षित होता है और No - NC व NC - NO बन जाता है।

Relay के Connection कैसे करें ?

अगर हम Relay से Switching करना चाहते है तो हमें सबसे पहले ये देखना होता है कि हमको Connection NO में करने है या NC में करने है। Relay में तीन Terminal होते है एक NO एक NC और एक Com. अगर हम चाहते है कि हमारे सर्किट में किसी भी दोष की स्थिति में हमारा सर्किट सप्लाई वोल्टेज से अलग हो जाए तो हम connection NC और com. के बीच करते है। और अगर हम चाहें की सर्किट के सप्लाई से अलग होते ही हमको कोई indication मिल जाए तो हम NO और com. के बीच Connection करते है। यानि कि supply voltage काटने के लिए NC और Com. व Supply Voltage जोड़ने के लिए NO और Com. के बीच Connection किए जाते है।

आज के समय में कई प्रकार की Relay मार्किट में उपलब्ध है, और हम Relay को कई तरीके से काम में ले सकते है। कुछ Relay ऐसी होती है जिनको हम Protection के लिए इस्तेमाल करते है, और कुछ को हम सिर्फ Switching के लिए इस्तेमाल में लाते है। जैसे कि Thermal Overload Relay जिसको हम अपनी Three Phase Induction Motors को Protect करने के लिए इस्तेमाल करते है। ये Thermal Overload Relay, Motor को Overload से बचाती है, ऐसे ही PC Relay को हम सिर्फ Switching के लिए इस्तेमाल करते है। इसी प्रकार से कई प्रकार की Relay होती है और उनका काम भी अलग - अलग होता है। कुछ Relay Switching करते है तो कुछ हमारे Machines को Protect करते है।

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Direct Online Starter in Hindi, Explain DOL Connection in Hindi.

July 16, 2018
Direct Online Starter जिसको हम D.O.L Starter भी बोलते है, इस पोस्ट में आपको D.O.L Starter के बारे में जानने को मिलेगा की हम DOL Starter के Connection कैसे करते है और ये कैसे काम करता है ? अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |

Direct Online Starter (DOL) को हम 7 HP तक कि मोटरों में इतेमाल करते है। इसको इस्तेमाल करने का हमारा मकसद अपनी मोटर को  safety Provide कराना होता है ताकि मोटर को Over Load, Over Current, Single Phasing, Bearing Jam या अन्य किसी भी वजह से कोई नुकसान ना हो। इस पोस्ट में आपको Direct Online Starter के बारे में अच्छे से पता चल जाएगा।
Direct Online Starter in Hindi
Direct On-Line Starter Connection

वैसे तो मार्किट में बने बनाए भी Direct Online Starter मिल जाते है, लेकिन अगर आप इस Starter  को खुद बनाना चाहते है तो इसके लिए आपको इन parts की जरूरत पड़ेगी।


  • Contactor
  • Overload Relay
  • NO Push Button
  • NC Push Button



इन सभी Parts को लेने के बाद आप ये देख लें कि आपके Contactor की Rating कितनी है और आपका Contactor कितने Voltage पर Operate होता है। Contactor लगभग 42V, 110V, 220V और 440V AC Supply और 24V DC Supply की Coil वाले होते है, तो सबसे पहले आप ये देख लें।

अब आपको ये देखना है कि अगर आपका Contactor 220V AC Coil वाला है तो आप Controlling, Neutral Wire की करना चाहते हो या  Phase Wire की। अगर आप Phase Wire की Controlling करना चाहते हो तो आप Phase Wire को सबसे पहले NC Push Button से Connect कर लें, उसके बाद आपको NC Push Button का Output, NO Push Button के input में देना होगा और NO Push Button का Output, Overload Relay के NC से जोड़ना होगा जैसे कि उप्पर Diagram में दिखा रखा है, फिर आपको Overload Relay की NC से Output लेकर Contactor के A1 वाले Connector में जोड़ना होगा। (Contactor की Coil के Terminal A1 और A2 होते है) इतना काम करने के बाद अब आपको Contactor के A2 वाले Connector को Neutral Wire से जोड़ना होगा। अब अगर आप अपना NO Push Button को Push करेंगे तो आपका Contactor ON हो जाएगा लेकिन NO Push Button को छोड़ने के साथ ही बंद भी हो जाएगा। हम चाहते है की NO Push Button को छोड़ने के बाद भी हमारा Contactor ON ही रहना चाहिए तो इसके लिए आपको अपने Contactor को Holding देना होगा। Holding देने के लिए आपके Contactor में एक NO Terminal होना चाहिए और अब आपको अपने NO Push Button के एक Terminal से एक और wire लेके Contactor के NO Terminal पर Connect करना होगा और फिर Contactor के दूसरे NO Terminal को NO Push Button के दूसरे Terminal से जोड़ना होगा।

बस इतना Connection करने के साथ ही तैयार हो जाएगा आपका Direct Online Starter.

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