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Types of DC Motor in Hindi, DC Series Motor, DC Shunt Motor and DC Compound Motor

July 27, 2018
जैसा कि हम सब जानते है, DC Motor DC Electrical Energy को Mechanical Energy में बदलती है। DC Motor को हम अक्सर Train, Tram, Crain, Tools, Toys etc. में बहुत ज्यादा इस्तेमाल में लाते है। DC Motor भी कई प्रकार की होती है, तो हम कैसे पता करेंगे कि किस Motor को कहाँ पर इस्तेमाल करना है। इस पोस्ट में हम इसी के बारे में जानेंगे कि DC Motor कितने प्रकार की होती है और किस मोटर का क्या काम होता है ? अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |
Types of dc Motor in hindi, dc series Motor, dc Shunt Motor, dc Compound Motor
DC Motor

DC Motor के प्रकार। (Types of DC Motor)



(1) DC Series Motor

(2) DC Shunt Motor
(3) DC Compound Motor

DC Compound Motor के भी तीन प्रकार होते है।

(i) Commutative Compound Motor
(ii) Differential Compound Motor


(1) DC Series Motor:- DC Series Motor की Field Winding, Armature के सीरीज में जोड़ी जाती है, इसीलिए इस मोटर को DC Series Motor कहते है। फील्ड वाइंडिंग मोटी तार की व कम टर्नस की होती है, जिसकी वजह से इसका Resistance कम होता है। इस मोटर को Field Winding और Armature Winding दोनों एक समान Current लेते है। मोटर बिना लोड के कम Current लेती है, और जैसे - जैसे लोड बढ़ता है Current भी बढ़ता जाता है। बिना लोड के इस मोटर को स्पीड बहुत ज्यादा होती है, लेकिन लोड के बढ़ने से कम हो जाती है। अगर Starting टार्क की बात करें तो स्टार्टिंग टार्क भी बहुत अधिक होता है, इसलिए इन मोटर्स को वहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है जहाँ पर high starting torque की जरूरत होती है और जहाँ पर लोड पहले से मोटर पर दिया रहता है। जैसे कि Metro Train यहाँ पर लोड पहले से ही मोटर पर होता है। इन motors का उपयोग Train, Tram, Crain, DC fan और Conveyors में सबसे ज्यादा किया जाता है, क्योकि यहाँ पर High Starting Torque चाहिए होता है और लोड पहले से ही Motor पर होता है।

(2) DC Shunt Motor:- इन Motor में Field Winding, Armature के Parallel में लगी होती है, और इन्हें DC Shunt Motor कहते है। इस Motor में field winding पतले तार की व अधिक टर्न की होती है, जिसकी वजह से field winding का Resistance अधिक होता है। इन Motors में Field Winding का Current एक समान ही रहता है लेकिन Armature Current लोड पर आधारित होता है। लोड बढ़ने पर बढ़ जाता है और लोड कम होने पर कम हो जाता है। इन मोटर की स्पीड पर लोड का कुछ ज्यादा प्रभाव नही पड़ता। बिना लोड के स्पीड ज्यादा होती है और लोड पड़ने पर थोड़ी सी कम हो जाती है। DC Shunt Motor का उपयोग ज्यादातर Tools में किया जाता है और लेथ मशीनों में भी इस मोटर को इस्तेमाल किया जाता है, क्योकि इन मोटरों की स्पीड हमेशा लगभग एक समान ही रहती है।

Compound Motor:- इन Motors में फील्ड वाइंडिंग सीरीज और पैरेलल दोनों में होती है। सीरीज फील्ड वाइंडिंग मोटी तार और कम टर्न की होती है, इसका Resistance कम होता है। सीरीज फील्ड वाइंडिंग में करंट लोड पर आधारित होता है। कम लोड होगा तो सीरीज वाइंडिंग कम करंट लेगी और अगर ज्यादा लोड होगा तो फील्ड वाइंडिंग ज्यादा करंट लेगी। पैरेलल फील्ड वाइंडिंग पतले तार व अधिक टर्न्स की होती है। इस वाइंडिंग का Resistance भी अधिक होता है। पैरेलल फील्ड वाइंडिंग में करंट लगभग एक समान ही रहता है।
Compound Motor भी दो प्रकार के होते है:-

Cumulative Compound Motor:- Cumulative Compound Motor के सीरीज और पैरेलल वाइंडिंग में करंट एक ही दिशा में Flow होता है। इन मोटरों में स्पीड लोड पर आधारित होती है, बिना लोड के स्पीड अधिक होगी और लोड के बढ़ने के साथ - साथ कम हो जाएगी। इन मोटरों को वहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है जहाँ पर लोड एक दम से मोटर पर आ जाता है और फिर चला जाता है। जैसे हैमर, पंचिंग मशीन, शेयरिंग मशीन, लिफ्ट आदि।

Differential Compound Motor:- इन मोटरों में सीरीज और वाइंडिंग एक दूसरे का विरोध करते है। इन मोटरों में ज्यादा लोड होने पर फ्लक्स कम होगा और कम लोड होने पर फ्लक्स ज्यादा होगा। इन मोटरों की ये खासियत है कि इन मोटरों की बिना लोड के कम स्पीड होती है और जैसे - जैसे लोड बढ़ता है स्पीड भी बढ़ती जाती है। इन मोटरों को ज्यादातर Battery Charging के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

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Types of DC Motor in Hindi, DC Series Motor, DC Shunt Motor and DC Compound Motor Types of DC Motor in Hindi, DC Series Motor, DC Shunt Motor and DC Compound Motor Reviewed by Joshi Brothers on July 27, 2018 Rating: 5

DC Motor Working Principle in Hindi, DC Motor Direction Changing Methods in Hindi

July 25, 2018
इस पोस्ट में हम दो topics के बारे में जानेंगे, DC Motor Working Principle in Hindi, और DC Motor Direction Changing Methods in Hindi, जैसा कि हमको पता है DC Motor, DC Electrical Energy को Mechanical Energy में बदलती है जोकि हमने पिछले पोस्ट में detail में discuss किया था। अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |
DC Motor Working Principle in Hindi
DC Motor Working Principle in hindi

DC Motor Working Principle in Hindi...

DC Motor मैग्नेटिक ड्रैग (Magnetic Drag) के सिद्धांत पर काम करती है। Magnetic Drag के सिद्धांत के अनुसार जब भी कोई करंट ले जाता हुवा कंडक्टर चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Area) में रखा जाता है तो उस कंडक्टर में एक टार्क पैदा होता है, जो उस कंडक्टर को मुख्य चुंबकीय अक्ष के 90° पर घुमाने की कोशिश करता है।

DC Motor Direction Changing Methods:-

कोई बार ऐसा होता है कि हमको अपने मोटर Direction Change करनी पड़ जाती है। DC Motor की Direction 2 तरह से बदली जा सकती है:-

(1) जो मुख्य चुंबकीय फील्ड है उसकी दिशा बदलकर और
(2) आर्मेचर में करंट की दिशा बदलकर।


(1) चुंबकीय फील्ड की दिशा बदलकर:- इस Method में हम DC Motor में चुंबकीय फील्ड की दिशा बदल देते है, जब चुंबकीय फील्ड की दिशा बदल जाती है तो उसकी वजह से मोटर की धूमने की दिशा भी बदल जाती है। माना पहले से मोटर में N और S पोल जहाँ है उसकी जगह पर S और N कर दिया जाता है।

(2) आर्मेचर में करंट की दिशा बदलकर:- इस Method में हम मोटर के आर्मेचर को दी जाने वाले DC Voltage की दिशा को बदल देते है जिससे मोटर के घूमने की दिशा बदल जाती है। पहले हमने जिस वायर में Positive और Negative Connection किए थे अब इन कनेक्शन को बदल कर Positive की जगह Negative और Negative की जगह Positive करने से मोटर के घूमने की दिशा बदल जाती है।

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What is DC Motor in Hindi, Where use DC Motor in Hindi

July 14, 2018
इस पोस्ट में हम जानेंगे कि DC Motor क्या होती है, और DC Motor को कहाँ - कहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है। अगर आप हमारी सभी latest पोस्ट का update पाना चाहते है, तो आप हमको Instagram पर Follow कर सकते है, क्योकि सभी latest पोस्ट हम Instagram पर update करते रहते है |
What is DC Motor in Hindi, Where use DC Motor in Hindi
What is DC Motor in Hindi, Where use DC Motor in Hindi

DC Motor एक ऐसी Machine है जो DC Electrical Energy को Mechanical Energy में बदलती है। DC Motor और DC Generator की बनावट एक समान होती है लेकिन इनका कार्य एक दूसरे से बिल्कुल अलग होता है। एक तरफ जहां DC Motor DC Electrical Energy को Mechanical Energy में बदलता है, तो वही DC Generator Mechanical Energy को DC Electrical Energy में बदलता है।


DC Motor Uses...

आज के समय मे DC Motor को काफी इस्तेमाल में लाया जाता हैं, क्योकि इनके इस्तेमाल से Electrical Energy को बचाया जा सकता है। dc motor तीन प्रकार की होती है और इसी के आधार पर इनको काम मे लिया जाता है।

(1) DC Series Motor....

 DC Series Motor की Field Winding, Armature के सीरीज में जोड़ी जाती है, इसीलिए इस मोटर को DC Series Motor कहते है। फील्ड वाइंडिंग मोटी तार की व कम टर्नस की होती है, जिसकी वजह से इसका Resistance कम होता है। इस मोटर को Field Winding और Armature Winding दोनों एक समान Current लेते है। मोटर बिना लोड के कम Current लेती है, और जैसे - जैसे लोड बढ़ता है Current भी बढ़ता जाता है। बिना लोड के इस मोटर को स्पीड बहुत ज्यादा होती है, लेकिन लोड के बढ़ने से कम हो जाती है। अगर Starting टार्क की बात करें तो स्टार्टिंग टार्क भी बहुत अधिक होता है, इसलिए इन मोटर्स को वहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है जहाँ पर high starting torque की जरूरत होती है और जहाँ पर लोड पहले से मोटर पर दिया रहता है। जैसे कि Metro Train यहाँ पर लोड पहले से ही मोटर पर होता है। इन मोटरों का इस्तेमाल Crain, Train, Tram, Fan, Trolley और Conveyor जैसी और भी बहुत जगह किया जाता है।

(2) DC Shunt Motor...

इन Motor में Field Winding, Armature के Parallel में लगी होती है, और इन्हें DC Shunt Motor कहते है। इस Motor में field winding पतले तार की व अधिक टर्न की होती है, जिसकी वजह से field winding का Resistance अधिक होता है। इन Motors में Field Winding का Current एक समान ही रहता है लेकिन Armature Current लोड पर आधारित होता है। लोड बढ़ने पर बढ़ जाता है और लोड कम होने पर कम हो जाता है। इन मोटर की स्पीड पर लोड का कुछ ज्यादा प्रभाव नही पड़ता। बिना लोड के स्पीड ज्यादा होती है और लोड पड़ने पर थोड़ी सी कम हो जाती है। इन मोटरों का उपयोग ज्यादातर Tools को बनाने के लिए किया जाता।

(3) DC Compound Motor.

इन Motors में फील्ड वाइंडिंग सीरीज और पैरेलल दोनों में होती है। सीरीज फील्ड वाइंडिंग मोटी तार और कम टर्न की होती है, इसका Resistance कम होता है। सीरीज फील्ड वाइंडिंग में करंट लोड पर आधारित होता है। कम लोड होगा तो सीरीज वाइंडिंग कम करंट लेगी और अगर ज्यादा लोड होगा तो फील्ड वाइंडिंग ज्यादा करंट लेगी। पैरेलल फील्ड वाइंडिंग पतले तार व अधिक टर्न्स की होती है। इस वाइंडिंग का Resistance भी अधिक होता है। पैरेलल फील्ड वाइंडिंग में करंट लगभग एक समान ही रहता है। Compound Motor भी दो प्रकार के होते है:-


(i) DC Commutative Compound Motor...

Cumulative Compound Motor के सीरीज और पैरेलल वाइंडिंग में करंट एक ही दिशा में Flow होता है। इन मोटरों में स्पीड लोड पर आधारित होती है, बिना लोड के स्पीड अधिक होगी और लोड के बढ़ने के साथ - साथ कम हो जाएगी। इन मोटरों को वहाँ पर इस्तेमाल किया जाता है जहाँ पर लोड एक दम से मोटर पर आ जाता है और फिर चला जाता है। इस प्रकार की मोटरो का उपयोग Sewing Machine, Pinching Machine, Power Hammer और Press जैसी कई मशीनों में किया जाता है।

(ii) Differential Compound Motor...
इन मोटरों में सीरीज और वाइंडिंग एक दूसरे का विरोध करते है। इन मोटरों में ज्यादा लोड होने पर फ्लक्स कम होगा और कम लोड होने पर फ्लक्स ज्यादा होगा। इन मोटरों की ये खासियत है कि इन मोटरों की बिना लोड के कम स्पीड होती है और जैसे - जैसे लोड बढ़ता है स्पीड भी बढ़ती जाती है। इस प्रकार की मोटरों का उपयोग बहुत कम किया जाता है ये मोटरें ज्यादा तक Battery को Charge करने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

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